वाल्मीकि रामायण 6.39.20
मनसा अपि दुरारोहम् किम् पुनः कर्मणा जनैः ।निविष्टा तत्र शिखरे लन्का रावण पालिता॥
manasā api durāroham kim punaḥ karmaṇā janaiḥ |niviṣṭā tatra śikhare lankā rāvaṇa pālitā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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