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वाल्मीकि रामायण 6.39.21
दशयोजनविस्तीर्णा विंशद्योजनमायता ।सा पुरी गोपुरैर् उच्चैः पाण्डुर अम्बुद सम्निभैः ।कान्चनेन च सालेन राजतेन च शोभिता॥
daśayojanavistīrṇā viṃśadyojanamāyatā |sā purī gopurair uccaiḥ pāṇḍura ambuda samnibhaiḥ |kāncanena ca sālena rājatena ca śobhitā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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