वाल्मीकि रामायण 6.39.2
सम सौम्यानि रम्याणि विशालान्य् आयतानि च ।दृष्टि रम्याणि ते दृष्ट्वा बभूवुर् जात विस्मयाः॥
sama saumyāni ramyāṇi viśālāny āyatāni ca |dṛṣṭi ramyāṇi te dṛṣṭvā babhūvur jāta vismayāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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