वाल्मीकि रामायण 6.40.13
इत्युक्त्वोत्थाय तं क्षिप्रं बाहुभ्यामाक्षिपत्तले ।कन्दुवत्स समुत्थाय बाहुभ्यामाक्षिपद्धरिः॥
ityuktvotthāya taṃ kṣipraṃ bāhubhyāmākṣipattale |kanduvatsa samutthāya bāhubhyāmākṣipaddhariḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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