वाल्मीकि रामायण 6.41.12
लोकक्षयकरं भीमं भयं पश्याम्युपस्थितम् ।निबर्हणं प्रवीराणामृक्षवानररक्षसाम्॥
lokakṣayakaraṃ bhīmaṃ bhayaṃ paśyāmyupasthitam |nibarhaṇaṃ pravīrāṇāmṛkṣavānararakṣasām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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