वाल्मीकि रामायण 6.41.17
रजन्यामप्रकाशश्च सन्तापयति चन्द्रमाः ।कृष्णरक्तान्तपर्यन्तो यथा लोकस्य सङ्क्षये॥
rajanyāmaprakāśaśca santāpayati candramāḥ |kṛṣṇaraktāntaparyanto yathā lokasya saṅkṣaye ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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