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वाल्मीकि रामायण 6.41.18
ह्रस्वो रूक्षो ऽप्रशस्तश्च परिवेषः सुलोहितः॥
hrasvo rūkṣo 'praśastaśca pariveṣaḥ sulohitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंह्रस्वो रूक्षो ऽप्रशस्तश्च परिवेषः सुलोहितः॥
hrasvo rūkṣo 'praśastaśca pariveṣaḥ sulohitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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