वाल्मीकि रामायण 6.41.46
दशनागबलाः केचित् केचिद्दशगुणोत्तराः ।केचिन्नागसहस्रस्य बभूवुस्तुल्यविक्रमाः॥
daśanāgabalāḥ kecit keciddaśaguṇottarāḥ |kecinnāgasahasrasya babhūvustulyavikramāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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