वाल्मीकि रामायण 6.41.94
चतुर्द्वाराणि सर्वाणि सुग्रीववचनात् कपिः ।पर्यक्रामत दुर्धर्षो नक्षत्राणीव चन्द्रमाः॥
caturdvārāṇi sarvāṇi sugrīvavacanāt kapiḥ |paryakrāmata durdharṣo nakṣatrāṇīva candramāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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