वाल्मीकि रामायण 6.44.23
ये त्वन्ये राक्षसा भीमा रामस्याभिमुखे स्थिताः ।ते ऽपि नष्टाः समासाद्य पतङ्ग इव पावकम्॥
ye tvanye rākṣasā bhīmā rāmasyābhimukhe sthitāḥ |te 'pi naṣṭāḥ samāsādya pataṅga iva pāvakam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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