वाल्मीकि रामायण 6.46.13
दूषणस्य च हन्तारौ खरस्य च महाबलौ ।सादितौ मामकैर्बाणैर्भ्रातरौ रामलक्ष्णौ॥
dūṣaṇasya ca hantārau kharasya ca mahābalau |sāditau māmakairbāṇairbhrātarau rāmalakṣṇau ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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