वाल्मीकि रामायण 6.46.22
गोलाङ्गूलेश्वरं चैव वालिपुत्रमथाङ्गदम् ।विव्याध बहुभिर्बाणैस्त्वरमाणो ऽथ रावणिः॥
golāṅgūleśvaraṃ caiva vāliputramathāṅgadam |vivyādha bahubhirbāṇaistvaramāṇo 'tha rāvaṇiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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