वाल्मीकि रामायण 6.46.32
अलं त्रासेन सुग्रीव बाष्पवेगो निगृह्यताम् ।एवं प्रायाणि युद्धानि विजयो नास्ति नैष्ठिकः॥
alaṃ trāsena sugrīva bāṣpavego nigṛhyatām |evaṃ prāyāṇi yuddhāni vijayo nāsti naiṣṭhikaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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