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वाल्मीकि रामायण 6.48.22
परिदेवयमानां तां राक्षसी त्रिजटा ऽब्रवीत्॥
paridevayamānāṃ tāṃ rākṣasī trijaṭā 'bravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंपरिदेवयमानां तां राक्षसी त्रिजटा ऽब्रवीत्॥
paridevayamānāṃ tāṃ rākṣasī trijaṭā 'bravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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