वाल्मीकि रामायण 6.48.7
वैधव्यं यान्ति यैर्नार्यो लक्षणैर्भाग्यदुर्लभाः ।नात्मनस्तानि पश्यामि पश्यन्ती हतलक्षणा॥
vaidhavyaṃ yānti yairnāryo lakṣaṇairbhāgyadurlabhāḥ |nātmanastāni paśyāmi paśyantī hatalakṣaṇā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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