वाल्मीकि रामायण 6.49.31
शुश्रुवस्तस्य ते सर्वे वानराः परिदेवनम् ।वर्तयाञ्चकुरश्रूणि नेत्रैः कृष्णेतरेक्षणाः॥
śuśruvastasya te sarve vānarāḥ paridevanam |vartayāñcakuraśrūṇi netraiḥ kṛṣṇetarekṣaṇāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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