वाल्मीकि रामायण 6.49.33
तं दृष्ट्वा त्वरितं यान्तं नीलाञ्जनचयोपमम् ।वानरा दुद्रुवुः सर्वे मन्यमानास्तु रावणिम् *॥
taṃ dṛṣṭvā tvaritaṃ yāntaṃ nīlāñjanacayopamam |vānarā dudruvuḥ sarve manyamānāstu rāvaṇim * ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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