वाल्मीकि रामायण 6.49.4
ततो दृष्ट्वा सरुधिरं विषण्णं गाढमर्पितम् ।भ्रातरं दीनवदनं पर्यदेवयदातुरः॥
tato dṛṣṭvā sarudhiraṃ viṣaṇṇaṃ gāḍhamarpitam |bhrātaraṃ dīnavadanaṃ paryadevayadāturaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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