वाल्मीकि रामायण 6.5.1
सा तु नीलेन विधिवत् स्वारक्षा सुसमाहिता ।सागरस्य उत्तरे तीरे साधु सेना विनिएशिता॥
sā tu nīlena vidhivat svārakṣā susamāhitā |sāgarasya uttare tīre sādhu senā vinieśitā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें