वाल्मीकि रामायण 6.5.7
तन् मे दहति गात्राणि विषम् पीतम् इव आशये ।हा नाथ इति प्रिया सा माम् ह्रियमाणा यद् अब्रवीत्॥
tan me dahati gātrāṇi viṣam pītam iva āśaye |hā nātha iti priyā sā mām hriyamāṇā yad abravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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