वाल्मीकि रामायण 6.52.20
परिघैर्मथिताः केचिद्भिन्दिपालैर्विदारिताः ।पट्टिशैराहताः केचिद्विह्वलन्तो गतासवः॥
parighairmathitāḥ kecidbhindipālairvidāritāḥ |paṭṭiśairāhatāḥ kecidvihvalanto gatāsavaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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