वाल्मीकि रामायण 6.52.32
विद्राव्य रासक्षं सैन्यं हनुमान् मारुतात्मजः ।गिरेः शिखरमादाय धूम्राक्षमभिदुद्रुवे॥
vidrāvya rāsakṣaṃ sainyaṃ hanumān mārutātmajaḥ |gireḥ śikharamādāya dhūmrākṣamabhidudruve ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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