वाल्मीकि रामायण 6.54.11
भुजपाणिशिरश्छिन्नाश्छिन्नकायाश्च भूतले ।वानरा राक्षसाश्चापि निपेतुस्तत्र वै रणे॥
bhujapāṇiśiraśchinnāśchinnakāyāśca bhūtale |vānarā rākṣasāścāpi nipetustatra vai raṇe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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