वाल्मीकि रामायण 6.54.14
प्रविवेश धनुष्पाणिस्त्रासयन् हरिवाहिनीम् ।शरैर्विदारयामास कङ्कपत्रैरजिह्मगैः॥
praviveśa dhanuṣpāṇistrāsayan harivāhinīm |śarairvidārayāmāsa kaṅkapatrairajihmagaiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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