वाल्मीकि रामायण 6.54.35
निर्मलेन सुधौतेन खड्गेनास्य महच्छिरः ।जघान वज्रदंष्ट्रस्य वालिसूनुर्महाबलः॥
nirmalena sudhautena khaḍgenāsya mahacchiraḥ |jaghāna vajradaṃṣṭrasya vālisūnurmahābalaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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