वाल्मीकि रामायण 6.54.9
हरयो राक्षसाश्चैव शेरते गां समाश्रिताः ।कङ्कगृध्रवलैराढ्या गोमायुगणसङ्कुलाः॥
harayo rākṣasāścaiva śerate gāṃ samāśritāḥ |kaṅkagṛdhravalairāḍhyā gomāyugaṇasaṅkulāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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