वाल्मीकि रामायण 6.55.21
शब्दश्च सुमहांस्तेषां नर्दतामभिधावताम् ।श्रूयते तुमुले युद्धे न रूपाणि चकाशिरे॥
śabdaśca sumahāṃsteṣāṃ nardatāmabhidhāvatām |śrūyate tumule yuddhe na rūpāṇi cakāśire ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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