वाल्मीकि रामायण 6.56.24
तमन्तकमिव क्रुद्धं समरे प्राणहारिणम् ।हनुमन्तमभिप्रेक्ष्य राक्षसा विप्रदुद्रुवुः॥
tamantakamiva kruddhaṃ samare prāṇahāriṇam |hanumantamabhiprekṣya rākṣasā vipradudruvuḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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