वाल्मीकि रामायण 6.58.19
नरान्तकः कुम्भहनुर्महानादः समुन्नतः ।एते प्रहस्तसचिवाः सर्वे जघ्नुर्वनौकसः॥
narāntakaḥ kumbhahanurmahānādaḥ samunnataḥ |ete prahastasacivāḥ sarve jaghnurvanaukasaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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