वाल्मीकि रामायण 6.58.24
अमृष्यमाणस्तत्कर्म प्रहस्तो रथमास्थितः ।चकार कदनं घोरं धनुष्पाणिर्वनौकसाम्॥
amṛṣyamāṇastatkarma prahasto rathamāsthitaḥ |cakāra kadanaṃ ghoraṃ dhanuṣpāṇirvanaukasām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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