वाल्मीकि रामायण 6.58.26
महता हि शरौघेण प्रहस्तो युद्धकोविदः ।अर्दयामास सङ्क्रुद्धो वानरान् परमाहवे॥
mahatā hi śaraugheṇa prahasto yuddhakovidaḥ |ardayāmāsa saṅkruddho vānarān paramāhave ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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