वाल्मीकि रामायण 6.58.27
वानराणां शरीरैश्च राक्षसानां च मेदिनी ।बभूव निचिता घोरा पतितैरिव पर्वतैः॥
vānarāṇāṃ śarīraiśca rākṣasānāṃ ca medinī |babhūva nicitā ghorā patitairiva parvataiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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