वाल्मीकि रामायण 6.58.29
हतवीरौघवप्रां तु भग्नायुधमहाद्रुमाम् ।शोणितौघमहातोयां यमसागरगमिनीम्॥
hatavīraughavaprāṃ tu bhagnāyudhamahādrumām |śoṇitaughamahātoyāṃ yamasāgaragaminīm ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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