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वाल्मीकि रामायण 6.58.3
राघवस्य वचः श्रुत्वा प्रत्युवाच विभीषणः॥
rāghavasya vacaḥ śrutvā pratyuvāca vibhīṣaṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंराघवस्य वचः श्रुत्वा प्रत्युवाच विभीषणः॥
rāghavasya vacaḥ śrutvā pratyuvāca vibhīṣaṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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