वाल्मीकि रामायण 6.58.47
उल्लिखन्तौ सुतीक्ष्णाभिर्दंष्ट्राभिरितरेतरम् ।सिंहशार्दूलसदृशौ सिंहशार्दूलचेष्टितौ॥
ullikhantau sutīkṣṇābhirdaṃṣṭrābhiritaretaram |siṃhaśārdūlasadṛśau siṃhaśārdūlaceṣṭitau ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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