वाल्मीकि रामायण 6.58.49
आजघान तदा नीलं ललाटे मुसलेन सः ।प्रहस्तः परमायत्तस्तस्य सुस्राव शोणितम्॥
ājaghāna tadā nīlaṃ lalāṭe musalena saḥ |prahastaḥ paramāyattastasya susrāva śoṇitam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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