वाल्मीकि रामायण 6.58.57
हते प्रहस्ते नीलेन तदकम्प्यं महद्बलम् ।रक्षसामप्रहृष्टानां लङ्कामभिजगाम ह॥
hate prahaste nīlena tadakampyaṃ mahadbalam |rakṣasāmaprahṛṣṭānāṃ laṅkāmabhijagāma ha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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