वाल्मीकि रामायण 6.59.118
हनुमानपि तेजस्वी लक्ष्मणं रावणार्दितम् ।अनयद्राघवाभ्याशं बाहुभ्यां परिगृह्य तम्॥
hanumānapi tejasvī lakṣmaṇaṃ rāvaṇārditam |anayadrāghavābhyāśaṃ bāhubhyāṃ parigṛhya tam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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