वाल्मीकि रामायण 6.59.135
राक्षसेनाहवे तस्य ताडितस्यापि सायकैः ।स्वभावतेजोयुक्तस्य भूयस्तेजो ऽभ्यवर्धत॥
rākṣasenāhave tasya tāḍitasyāpi sāyakaiḥ |svabhāvatejoyuktasya bhūyastejo 'bhyavardhata ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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