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वाल्मीकि रामायण 6.59.140
तं विह्वलन्तं प्रसमीक्ष्य रामः समाददे दीप्तमथार्धचन्द्रम् ।तेनार्कवर्णं सहसा किरीटं चिच्छेद रक्षोधिपतेर्महात्मा॥
taṃ vihvalantaṃ prasamīkṣya rāmaḥ samādade dīptamathārdhacandram |tenārkavarṇaṃ sahasā kirīṭaṃ ciccheda rakṣodhipatermahātmā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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