वाल्मीकि रामायण 6.59.144
स एवमुक्तो हतदर्पहर्षो निकृत्तचापः स हताश्वसूतः ।शरार्दितः कृत्तमहाकिरीटो विवेश लङ्कां सहसा स राजा॥
sa evamukto hatadarpaharṣo nikṛttacāpaḥ sa hatāśvasūtaḥ |śarārditaḥ kṛttamahākirīṭo viveśa laṅkāṃ sahasā sa rājā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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