वाल्मीकि रामायण 6.59.2
गत्वा ऽथ रक्षोधिपतेः शशंसुः सेनापतिं पावकसूनुशस्तम् ।तच्चापि तेषां वचनं निशम्य रक्षोधिपः क्रोधवशं जगाम॥
gatvā 'tha rakṣodhipateḥ śaśaṃsuḥ senāpatiṃ pāvakasūnuśastam |taccāpi teṣāṃ vacanaṃ niśamya rakṣodhipaḥ krodhavaśaṃ jagāma ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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