वाल्मीकि रामायण 6.59.31
दिष्ट्या ऽयमद्य पापात्मा मम दृष्टिपथं गतः ।अद्य क्रोधं विमोक्ष्यामि सीताहरणसम्भवम्॥
diṣṭyā 'yamadya pāpātmā mama dṛṣṭipathaṃ gataḥ |adya krodhaṃ vimokṣyāmi sītāharaṇasambhavam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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