वाल्मीकि रामायण 6.59.36
तमापतन्तं सहसा समीक्ष्य दीप्तेषुचापं युधि राक्षसेन्द्रम् ।महत् समुत्पाट्य महीधराग्रं दुद्राव रक्षोधिपतिं हरीशः॥
tamāpatantaṃ sahasā samīkṣya dīpteṣucāpaṃ yudhi rākṣasendram |mahat samutpāṭya mahīdharāgraṃ dudrāva rakṣodhipatiṃ harīśaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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