वाल्मीकि रामायण 6.59.39
स तं गृहीत्वा ऽनिलतुल्यवेगं सविस्फुलिङ्गज्वलनप्रकाशम् ।बाणं महेन्द्राशनितुल्यवेगं चिक्षेप सुग्रीववधाय रुष्टः॥
sa taṃ gṛhītvā 'nilatulyavegaṃ savisphuliṅgajvalanaprakāśam |bāṇaṃ mahendrāśanitulyavegaṃ cikṣepa sugrīvavadhāya ruṣṭaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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