वाल्मीकि रामायण 6.59.50
तस्य च्छिद्राणि मार्गस्व स्वच्छिद्राणि च लक्षय ।चक्षुषा धनुषा यत्नाद्रक्षात्मानं समाहितः॥
tasya cchidrāṇi mārgasva svacchidrāṇi ca lakṣaya |cakṣuṣā dhanuṣā yatnādrakṣātmānaṃ samāhitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें