वाल्मीकि रामायण 6.59.55
देवदानवगन्धर्वैर्यक्षैश्च सह राक्षसैः ।अवध्यत्वं त्वया प्राप्तं वानरेभ्यस्तु ते भयम्॥
devadānavagandharvairyakṣaiśca saha rākṣasaiḥ |avadhyatvaṃ tvayā prāptaṃ vānarebhyastu te bhayam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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