Loading
वाल्मीकि रामायण 6.59.66
धिगस्तु मम वीर्येण यस्त्वं जीवसि रावण ।सकृत्तु प्रहरेदानीं दुर्बुद्धे किं विकत्थसे ।ततस्त्वां मामिका मुष्टिर्नयिष्यति यमक्षयम्॥
dhigastu mama vīryeṇa yastvaṃ jīvasi rāvaṇa |sakṛttu praharedānīṃ durbuddhe kiṃ vikatthase |tatastvāṃ māmikā muṣṭirnayiṣyati yamakṣayam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें