वाल्मीकि रामायण 6.59.88
एवमुक्त्वा महाबाहू रावणो राक्षसेश्वरः ।सन्धाय बाणमस्त्रेण चमूपतिमताडयत्॥
evamuktvā mahābāhū rāvaṇo rākṣaseśvaraḥ |sandhāya bāṇamastreṇa camūpatimatāḍayat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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