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वाल्मीकि रामायण 6.59.94
स तस्य वाक्यं प्रतिपूर्णघोषं ज्याशब्दमुग्रं च निशम्य राजा ।आसाद्य सौमित्रिमवस्थितं तं कोपान्वितो वाक्यमुवाच रक्षः॥
sa tasya vākyaṃ pratipūrṇaghoṣaṃ jyāśabdamugraṃ ca niśamya rājā |āsādya saumitrimavasthitaṃ taṃ kopānvito vākyamuvāca rakṣaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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